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बैंकों को मिलेंगे 20,000 करोड़ रुपये

बैंकों को मिलेंगे 20,000 करोड़ रुपये

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को अगले चार साल में अपनी 1.80 लाख करोड़ रुपये की पूंजी जरूरतों में से आधे से अधिक को पूरा करने के लिए बाजारों से 1.10 लाख करोड़ रुपये जुटाने की जरूरत होगी। वित्त मंत्रालय ने 1.80 लाख करोड़ रुपये की पूंजी जरूरत का अनुमान लगाया है, जिसमें से सरकार की मौजूदा व आगामी वित्त वर्ष में क्रमश: 25,000 करोड़ रुपये व 25,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने की योजना है। इसके बाद 2017-18 व 2018-19 में वह 10,000 करोड़ रुपये (प्रत्येक) उपलब्ध कराने की मंशा रखती है।

मंत्रालय के बयान के अनुसार,’मूल्यांकन बढ़ने तथा गैर- प्रमुख आस्तियों (एनपीए) का मूल्य मिलने के साथ साथ पूंजी उत्पादकता में सुधार के चलते सार्वजनिक बैंक बाकी 1,10,000 करोड़ रुपये बाजार से जुटाने में सक्षम होंगे।’ इससे पहले दिन में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सार्वजनिक बैंकों में 12,010 करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी डालने में संसद की मंजूरी चाही। इस तरह से 7940 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान के साथ कुल प्रस्तावित पूंजी निवेश बढ़कर लगभग 20,000 करोड़ रुपये हो जाएगा।

सरकार ने चालू वित्त वर्ष के दौरान 25,500 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च के लिए संसद की मंजूरी मांगी है। इसमें से करीब आधी राशि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अतिरिक्त पूंजी डालने के लिए इस्तेमाल की जाएगी। इससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को फंसे कर्ज की स्थिति से उबरने में मदद मिलेगी।

 

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