Breaking News
July 1, 2019 - डाक विभाग डिजिटल टेक्नालाजी के साथ कस्टमर-फ्रेंडली सेवाओं का  बढ़ा रहा दायरा – डाक निदेशक के के यादव
July 1, 2019 - बिहार के महादलितो को बंधुआगिरी से मिली मुक्ति, न्याय की आस में जंतर मंतर पर धरना
July 1, 2019 - अंतराष्ट्रीय मध्यम एवं लघु उद्योग दिवस के अवसर पर ‘राष्ट्रिय कवि सम्मलेन’- न्यूज़ इंक
July 1, 2019 - डाक टिकटों का शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने में अहम योगदान-डाक निदेशक के के यादव
May 31, 2019 - भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, क्षेत्रीय मुख्यालय (उत्तरी क्षेत्र) में विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया गया
May 31, 2019 - नरेंद्र मोदी ने किसको सौंपा कौन सा मंत्रालय ?
May 31, 2019 - राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य व साउथ ईस्ट एशिया में अग्रणी रहने पर राजस्थान को  मिला अवार्ड
May 3, 2019 - इरकॉन ने मनाया 43वां वार्षिक दिवस
प्रदेश में बालकों की देखरेख और संरक्षण अधिनियम को प्रभावी ढ़ंग से लागू करें

प्रदेश में बालकों की देखरेख और संरक्षण अधिनियम को प्रभावी ढ़ंग से लागू करें

जयपुर 24 मार्च 2018:  सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री जे सी माहन्ती ने कहा कि प्रदेश में बालकों की देखरेख और संरक्षण अधिनियम को प्रभावी ढ़ंग से लागू कर संप्रेक्षण गृह में रह रहे 18 साल तक के बच्चों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए सभी को मिलकर प्रभावी ढ़ंग से कार्य करना है।
श्री माहंती शनिवार को बाल अधिकारिता विभाग द्वारा यहां ओटीएस में आयोजित किशोर न्यास बोर्ड के सदस्यों के लिए आठ दिवसीय राज्य स्तरीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित जिलों से आए  प्रिंसिपल मजिस्ट्रेटों एवं बाल कल्याण समिति के सदस्यों को संबोधित कर रहे थे ।
  उन्होंने कहा कि प्रदेश में 20 हजार  ऎसे बच्चे हैं जो संप्रेक्षण एवं चाइल्ड होम में रह रहे हैं, जिनमें कई बाल अपचारी बच्चे हैं,जिन्होंने किसी कारणवश अपराध किया है, उन्हें विभिन्न तरह का कौशल  प्रक्षिशण देने के साथ संप्रेषण गृह में ऎसा ऎसी गतिविधियां आयोजित की जाए जिससे बाहर निकलने के बाद समाज के साथ सहजता से आम जीवन  जी सके।
उन्होंने जे जे एक्ट  के तहत सचालित चाइल्ड होम में रह रहे बच्चों के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करने के लिए विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं एवं स्थानीय भामाशाहों का सहयोग लिया जा सकता है ।
उन्होंने ने प्रदेश में संचालित पालनहार योजना मैं बेसहारा निरासित  2 लाख बच्चों को लाभ पहुंचाया जा रहा है, उनके भरण-पोषण और शिक्षा की व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा की जा रही है जो एक ऎतिहासिक कार्य है । 6 वर्ष तक के बच्चों को 500 एवं  6 से18 वर्ष तक की बच्चों को एक हजार  रुपये की प्रति माह सहायता दी जाती है  ।
श्री महन्ती ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में आए प्रिंसिपल मजिस्ट्रेटों एवं बाल कल्याण समिति के सदस्यों  व अध्यक्षों से बच्चों के संरक्षण एवं सुरक्षा व बेहतर पुनर्वास के लिए दिए गए सकारात्मक सुझावों को गंभीरता से लागू करने का विश्वास दिलाते हुए कहा कि बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए सभी तरह के प्रयास किए जाएंगे ।
 इस अवसर पर बाल अधिकारिता विभाग की अतिरिक्त निदेशक श्रीमती श्रूति भारद्वाज ने बताया कि बाल अधिकारिता विभाग द्वारा प्रदेश में बच्चों के बेहतर पुनर्वास व सुरक्षा के लिए किशोर न्याय बोर्ड अधिनियम के तहत उनकी देखरेख व संरक्षण के प्रति सजग है ।
उन्होंने  प्रक्षिशण  कार्यक्रम में जिलों से आए प्रिंसिपल मजिस्ट्रेटों  एवं बाल कल्याण समिति के सदस्यों से प्रदेश में किशोर न्याय बोर्ड अधिनियम को प्रभावी ढं़ग से लागू करने के लिए सुझाव आमंत्रित करते हुए कहा कि जिलों मैं आ रही समस्याओं का प्राथमिकता से समाधान करने का प्रयास किया जाएगा । प्रक्षिशण कार्यक्रम में दिल्ली से आये एडवोकेट श्री आनंद कुमार अस्थाना ने  किशोर न्याय बोर्ड अधिनियम की विभिन्न धाराओं मैं किए गए प्रावधानों की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि बच्चों के संरक्षण के  लिए अधिनियम में देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों हेतु बाल कल्याण समिति एवं विधि से संघर्षरत बालकों के मामलों में प्राप्त करने सुनवाई करने एवं न्याय निर्णय हेतु किशोर न्यास बोर्ड का गठन संचालन का  विशेष प्रावधान किया गया है।