Breaking News
March 20, 2020 - कोरोना से बचाव के लिए डाकघरों में हुए विशेष प्रबंध
March 20, 2020 - कमलनाथ ने दिया मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा
March 20, 2020 - चंद्रप्रकाश राज अध्यक्ष व पंकज श्रीवास्तव महासचिव बने
March 18, 2020 - प्रत्येक ट्रिप के पूर्व बसों को सैनिटाइजर करें-जिलाधिकारी
February 28, 2020 - केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री को लिखा पत्र- जल शक्ति मिशन में राजस्थान के लिए 90 प्रतिशत अंशदान – मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत
February 28, 2020 - सारण जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए जिलाधिकारी ने दिया शक्त निर्देश
February 26, 2020 - भवन निर्माण तकनीकी में बदलाव जरुरी -जिलाधिकारी सारण
February 26, 2020 - उत्तर प्रदेश परिमण्डल की मेजबानी में 33वीं अखिल भारतीय डाक फुटबॉल प्रतियोगिता का शुभारम्भ

संसद की कैंटीन में भोजन पर 14 करोड़ की सब्सिडी

सूचना के अधिकार के तहत आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष अग्रवाल को लोकसभा सचिवालय ने बताया कि वर्ष 2013-14 के दौरान लोकसभा सचिवालय ने 14 करोड़ नौ लाख रुपये की सब्सिडी कैंटीनों के लिए प्रदान की। सुभाष अग्रवाल को कैंटीनों में भोजन पर दी जा रही सब्सिडी की जानकारी लेने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। कई स्तरों पर अपील करने के बाद आखिरकार यह जानकारी मिल पाई।

आरटीई के जवाब में कहा गया है कि संसद कैंटीन रेट में दिसंबर 2002, अप्रैल 2003 और दिसंबर 2010 में इजाफा किया गया था। यानि पिछले पांच सालों से रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है जबकि महंगाई दर कई गुणा बढ़ चुकी है।

लोकसभा सचिवालय के मुताबिक खाने-पीने पर सब्सिडी का खर्च बढ़ता जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2009-10 में यह 10.46 करोड़ था, जो 2012-13 में 12.52 करोड़ और इसके एक साल के बाद 14.09 करोड़ पहुंच गया। इसके बाद के आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं।

जानकारी के तहत मालूम हुआ है कि कैंटीनों में मसाला-डोसा की कीमत छह है। लेकिन इसे बनाने में जो सामग्री इस्तेमाल होती है, उसकी कीमत उत्तरी रेलवे को 23.26 रुपये पड़ रही है। इसी प्रकार मटन करी 20 रुपये में मिलती है जबकि उसकी कीमत 61.36 रुपये पड़ रही है। नानवेज थाली की कीमत 33 रुपये है, लेकिन इसमें 99.04 रुपये की सामग्री इस्तेमाल होती है। इसी प्रकार दाल फ्राई चार रुपये की मिलती है, जबकि उसकी सामग्री की ही लागत 13.11 रुपये बैठ रही है। जबकि उसमें कामगारों का वेतन आदि नहीं जुड़ा होता है।

आरटीआई एक्टिवस्ट सुभाष चंद्र अग्रवाल का कहना है कि सांसदों को भत्ते के रुप में कई तरह की सुविधाएं दी जाती है तो जनता के पैसे से सांसदों को खाने में सब्सिडी देने की क्या जरूरत है। इस सुविधा को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।

Leave a reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *