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अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेला राजस्थान मंडप में गुलरूख सुल्तान की कला से रोमांचित दर्शक

अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेला राजस्थान मंडप में गुलरूख सुल्तान की कला से रोमांचित दर्शक

नई दिल्ली, 18 नवम्बर, 2015। नई दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे 35वें अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में जयपुर से आई लाख की चूड़ियॉं बनाने में माहिर महिला शिल्पकार श्रीमती गुलरूख सुल्तान राजस्थान मंडप में आ रहे दर्शकों विशेषकर महिलाओं को अपने हुनर से रोमांचित कर रही है।

गुलाबी शहर जयपुर में ही जन्मी श्रीमती गुलरूख सुल्तान पढ़ाई के साथ-साथ अपने वालिद श्री आवाज मोहम्मद के साथ बचपन से ही पुस्तैनी काम में लगी हुई हैं। श्रीमती गुलरूख ने अपनी लाख कारीगरी के हुनर का लोहा पूरी दुनिया में मनवाया है। उन्हे वर्ष 2012 में युनेस्को द्वारा ‘‘शील ऑफ एक्सीलैंस अवार्ड’’ क्रॉम मलेशिया से नवाजा गया, लाख की हुनबंदी के लिए श्रीमती गुलरूख के वर्ष 2009-10 में स्टेट अवार्ड भी मिल चुका है। श्रीमती गुलरूख अपनी पुस्तैनी लाख कारीगरी में बेहद माहिर एवं एक बेहतरीन लाख प्रशिक्षक भी है। उन्होनंे बताया कि लाख की कारीगरी के लिए उनके वालिद श्री आवाज मोहम्मद साहब को आगामी 9 दिसम्बर को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा, इससे पहले श्री मोहम्मद को मुम्बई की ‘‘पारम्परिक कारीगर संस्था’’ द्वारा ‘वेस्ट इनोवेटिव कारीगर’ के पुरस्कार के साथ-साथ जयपुर की महारानी श्रीमती पद्मनी द्वारा महाराजा भवानी सिंह के जन्म दिवस पर चांदी का कलश एवं नगदी द्वारा राजपरिवार के लाख कारीगर के रूप में सम्मान मिल चुका है। श्री आवाज मोहम्मद के खानदान द्वारा तैयार लाख के आइटम्स विदेशों मे भी निर्यात किए जाते है।
आवाज मोहम्मद परिवार के ‘लाख के गुलाल घोटो’ की पूरी दुनिया में धाक

राजस्थान पेवेलियन में लाख की कला का प्रदर्शन कर रही श्रीमती गुलरूख सुल्तान ने बताया कि उनके परिवार द्वारा बनाए जाने वाले ‘लाख के गुलाल घोटे’ पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हो चुके है। होली के अवसर पर काम आने वाले इन गुलाल घोटो का निर्माण एकाधिकार इस परिवार की हुनरबंदी का एक उदाहरण है। उन्होने बताया कि हमारे परिवार की सात पीढ़ियाँ इन ‘गुलाल घोटो’ को जयपुर के राजपरिवार के लिए विशेष रूप से तैयार करती आ रही है। अब इन घोटों की देश-विदेश में काफी मांग बढ़ रही है।
लाख के हुनर को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम

राजस्थान पेवेलियन में दर्शकों एवं खरीदारों के सामने अपनी लाख की कारीगरी दिखाती श्रीमती गुलरूख सुल्तान बताती है कि हमारे परिवार द्वारा लाख के काम को जन-जन की पहचान बनाने के लिए अक्सर ट्रैनिंग एवं वर्कशॉप कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

उन्होने बताया कि हाल ही में झारखण्ड की 20 आदिवासी लड़कियों कों उन्होने जयपुर सेंटर पर लाख आभूषणों की कारीगरी का प्रशिक्षण दिया है। साथ ही हम स्कूल, कॉलेजों में लड़कियों को लाख की कारीगरी का प्रशिक्षण एवं वर्कशॉप कार्यक्रम आयोजित करते रहते है।

लाख बनाने की प्रक्रिया को अन्जाम देने के बारे में गुलरूख के भाई मोहम्मद जावेद बताते हैं कि पहले लाख के कीड़े को मिट्टी की हांडी में पाला जाता है जो कि सामान्यतः चार महीने में ये कीड़े बड़े हो जाते हैं। इसके बाद इनको पेड़ के अन्दर छोड़ दिया जाता है जहां ये अपने मुंह की लार से लाख पैदा करते हें। इसको सूखने पर तोड़ लिया जाता है।