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2030 तक एड्स की समाप्ति’ के खि‍लाफ लड़ाई में भारत-अफ्रीका का संयुक्त संकल्प

2030 तक एड्स की समाप्ति’ के खि‍लाफ लड़ाई में भारत-अफ्रीका का संयुक्त संकल्प

भारत एचआईवी और एड्स के खिलाफ लड़ाई में दुनिया के प्रति‍ और विशेष रूप से वर्ष 2030 तक एड्स की महामारी को समाप्त करने के संयुक्त संकल्प में अफ्रीकी देशों की मदद के लिए आगे आने के प्रति कटिबद्ध है। भारत इस लक्ष्य को पाने के लिए क्रियान्वयन के तौर-तरीकों और सहयोग की साझा रूपरेखा विकसित करने में अपने ज्ञान और विशेषज्ञता को साझा करने में अपनी ओर से हरसंभव सहायता एवं सहयोग प्रदान करेगा। ये बातें केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे पी नड्डा ने आज यहां “2030 तक एड्स महामारी की समाप्ति” विषय पर आयोजित भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन में कहीं।

श्री नड्डा ने एड्स महामारी की समाप्ति के लिए अफ्रीकी देशों के संकल्प और उनके निरंतर सामूहिक प्रयासों की बदौलत अफ्रीकी महाद्वीप के अनेक देशों में एड्स संक्रमण के नए मामलों में उल्लेखनीय कमी के लिए इन देशों की सराहना करते हुए कहा, “एड्स से जुड़ी जागरूकता बढ़ाने और संबंधित लोगों को सेवाएं प्रदान करने एवं इसके इलाज की सुविधा के विस्तार में अफ्रीका के शुरुआती अनुभव से भारत ने बहुत कुछ सीखा है। आज भी हम भारत में मलावी की बी+ रणनीति को अमल में ला रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि एचआईवी से ग्रस्त किसी भी बच्चे का जन्म न हो और सभी बच्चों को इलाज सुलभ हो। इस तरह के अनुभवों से मिली सीख से भारत को एड्स के खिलाफ लड़ाई के लिए अपनी सफल रणनीतियां बनाने में मदद मिली है।”

श्री नड्डा ने कहा कि भारत सुरक्षित, किफायती और सभी के लिए सुलभ एंटीरेट्रोवाइरल दवाइयां मुहैया कराने में अफ्रीका के साथ साझेदारी कर काफी प्रसन्न है। उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में दवाओं से जुड़ी जिन्स की सुरक्षा पर निश्चित तौर पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत यह सुनिश्चित करने के लिए कटिबद्ध है कि जीवन रक्षक दवाओं तक निरंतर एवं निर्बाध पहुंच के लिए ट्रिप्स संबंधी लचीलेपन का पूर्ण दोहन किया जाए क्योंकि यह गरीबों के लिए जीवन रेखा साबित हुई है।

इक्विटी, सामाजिक न्याय और सामुदायिक सशक्तिकरण के सिद्धांतों का इस्तेमाल करते हुए लोगों की देखभाल का ख्याल रखने वाले स्वस्थ समुदाय के बिना आर्थिक विकास संभव नहीं है, इस विशेष तथ्य को ध्यान में रखते हुए श्री नड्डा ने कहा कि हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि नए वैज्ञानिक अनुसंधान और स्वास्थ्य के लाभ समुदायों को आसानी से मिल सके। इसका मतलब यही है कि स्वास्थ्य नियामक की रूपरेखा और क्रियान्वयन के तौर-तरीके सृजित करने की जरूरत है जिससे कि उच्च गुणवत्ता वाली दवाओं और तकनीकों के सुगम प्रवाह के साथ-साथ भारत और अफ्रीका के अधिकतम लोगों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य कर्मचारियों की संख्या काफी हद तक बढ़ाई जा सके।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने एचआईवी और स्वास्थ्य से जुड़ी जिन्स सुरक्षा पर संयुक्त भारत-अफ्रीका सहयोग की रूपरेखा तैयार करने संबंधी केन्या के राष्ट्रपति श्री उहूरू केन्याटा के विचार की भी सराहना की। उन्होंने इसे महत्वपूर्ण बताते हुए आश्वासन दिया कि वह इस सिफारिश को आगे ले जाएंगे। श्री नड्डा ने एड्स के खिलाफ जंग में युवाओं को शामिल करने और नई पीढ़ी में नेतृत्व विकसित करने संबंधी सुझाव का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका की जनता को एआरटी उपलब्ध कराने से जुड़ी उसकी सफलता की गाथा के साथ-साथ माता-पिता से बच्चे को संचरण की रोकथाम (पीपीटीसीटी) कार्यक्रम ऐसी खास पहल हैं, जिन्हें भारत भी अपने यहां शुरू कर सकता है।

स्वास्थ्य राज्य मंत्री श्री श्रीपद यसो नाइक ने कहा कि एड्स/एचआईवी के खिलाफ जंग में भारत ने काफी प्रगति की है और यह विभिन्न हितधारकों के समर्थन एवं सामूहिक प्रयासों से ही संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राष्ट्रों के बीच आपसी सहयोग के जरिये वर्ष 2030 तक एड्स महामारी की समाप्ति संभव है।

केन्या के राष्ट्रपति श्री केन्याता ने इस शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन में स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी जिन्स सुरक्षा, एचआईवी से प्रभावित व संक्रमित लोगों तक जीवन रक्षक दवाओं की निरंतर पहुंच सुनिश्चित करने, अफ्रीकी देशों में एड्स महामारी की समाप्ति के लिए सरकारी प्रतिबद्धता की अहमियत और दवा उत्पादन एवं क्षमता सृजन में साझेदारी बढ़ाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों जैसे भारत और अफ्रीका के बीच संचालनात्मक सहयोगी रूपरेखा तैयार करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत जीवन रक्षक दवाओं के उत्पादन में अपने ज्ञान एवं विशेषज्ञता के जरिये अफ्रीकी देशों की मदद कर सकता है, ताकि उनकी घरेलू दवा उत्पादन क्षमता बढ़ सके। उन्होंने विभिन्न देशों से स्वास्थ्य सेवा उद्योग में निवेश करने और निजी कोष आकर्षित करने के लिए वित्त पोषण के मॉडल एवं रूपरेखा तैयार करने का भी आग्रह किया। उन्होंने विकास से जुड़े भागीदारों से साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए वित्त पोषण से जुड़ी खाई को पाटने का आग्रह भी किया।

मलावी, उगांडा, रवांडा और टोगो के प्रतिनिधि मंत्रियों ने भी कुछ इसी तरह के विचार व्यक्त किए। यूएनएड्स के कार्यकारी निदेशक श्री माइकल सिडबे ने अफ्रीकी देशों में एड्स/ एचआईवी की दवाओं के स्थानीय उत्पादन की अहमियत और इसे संभव कर दिखाने में भारत की अग्रणी एवं भागीदारी वाली भूमिका पर भी विशेष जोर दिया। अफ्रीकी संघ आयोग के उपाध्यक्ष श्री एरासटस मवेंचा ने कहा कि भारत और अफ्रीका एक-दूसरे से सीखने में समान आकांक्षाओं और अनूठे अनुभवों को साझा करते हैं। उन्होंने एड्स के खिलाफ लड़ाई में भारत की मदद की सराहना की और क्षमता सृजन, किफायती दवाओं की आपूर्ति एवं तकनीक को साझा करने के जरिये अफ्रीका में स्वास्थ्य प्रणालियों की मजबूती में भारत की भूमिका पर प्रकाश डाला।

श्री बी पी शर्मा ने अपने संबोधन के तहत इस महाद्वीप में एड्स के खिलाफ जंग में भारत और अफ्रीका के बीच साझेदारी पर रोशनी डाली। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, शिक्षाविदों, विशेषज्ञों और विकास भागीदारों के प्रतिनिधियों ने इस शिखर सम्मेलन में भाग लिया। “वर्ष 2030 तक एड्स महामारी की समाप्ति पर भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन” का आयोजन आज दो दिवसीय भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन से इतर हुआ, जिसका समापन कल नई दिल्ली में हुआ था।

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