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इनक्रिप्शन पॉलिसी में WhatsApp, Facebook शामिल नहीं

इनक्रिप्शन पॉलिसी में WhatsApp, Facebook शामिल नहीं

डिपार्टमेंट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (DEITY) ने अपनी वेबसाइट पर लिखा है कि एनक्र‍िप्शन पॉलिसी में कई ऐसी कैटे‍गिरी हैं, जिन्हें इस नीति से छूट मिलेगी। जबकि इससे पहले विभाग ने कहा था कि एनक्रि‍प्टेड मैसेजिंग सर्विस के तहत भेजे जाने वाले सभी मैसेज को 90 दिनों तक सुरक्षि‍त रखना अनिवार्य होगा।

यानी व्हाट्सअप एंड्रॉयड वर्जन सपोट्र्स, गूगल हैंगआउट और एप्पल आईमैसेज जैसी सर्विस का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स किसी भी सूरत में 90 दिनों से पहले अपनी चैट हिस्ट्री को डिलीट नहीं कर पाएंगे।

 

वॉट्सऐप, स्नैपचैट और गूगल हैंगआउट्स जैसे इंटरनेट बेस्ड संदेश डिलीट करना जल्द ही आपकी मुश्‍किल बढ़ा सकता है. मैसेज बॉक्स से मैसेज डिलीट करना जल्द ही गैरकानूनी करार दिया जा सकता है. ऐसा भी हो सकता है कि आपको 90 दिन पुराने सारे रिसीव्ड मैसेज प्लेन टेक्स्ट में सेव करके रखने पड़ें और किसी भी जांच में आपको पुलिस का सहयोग करना पडे. लेकिन डरें नहीं फिलहाल यह (इनक्रिप्शन नीति) लागू नहीं हुआ है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार सरकार ने किसी भी मोबाइल उपकरण या कंप्यूटर से भेजे गए एसएमएस और ईमेल सहित कूट भाषा वाले सभी संदेशों को नई इनक्रिप्शन नीति के तहत 90 दिनों तक अनिवार्य रुप से स्टोर करके रखने का प्रस्ताव किया है. प्रस्ताव के मुताबिक, आप जो भी संदेश भेजें, चाहे वह व्हाट्सऐप से, एसएमएस से, ईमेल से या किसी अन्य सेवा से भेजा गया हो, उसे 90 दिनों के लिए अनिवार्य रुप से स्टोर करके रखना होगा और मांगने पर उसे सुरक्षा एजेन्सियों को उपलब्ध कराना होगा.

इनक्रिप्शन पॉलिसी

जब आप व्हाट्सएप पर मैसेज भेजते हैं तो वह अपने आप इन्क्रिप्टेड हो जाता है या फिर स्क्रैम्बल्ड टेक्स्ट में बदल जाता है। जब वह रिसीवर तक पहुंचता है तो वह फिर नॉर्मल टेक्स्ट में बदल जाता है। व्हाट्सएप में नॉर्मल मैसेज तो आपकी चैट हिस्ट्री में होते हैं, लेकिन एंड्रायड का उदाहरण लें तो उसमें फाइल मैनेजर में व्हाट्सएप का फोल्डर होता है। उस फोल्डर में डाटाबेस का एक और फोल्डर होता है। इस फोल्डर के अंदर db.crypt8 के साथ इन्क्रिप्टेड चैट हिस्ट्री रोजाना सुबह 3 से 4 बजे के बीच स्टोर हो जाती है। आठ दिन का डाटा आपके फोल्डर में होता है। बाकी डाटा सर्वर में सेव होता जाता है।

व्हाट्सएप तथा द्वारा भेजे जाने वाले मैसेजेज, फोटो तथा ऑडियो और वीडियो एंड टू एंड इनक्रिप्टेड कोड वाली तकनीक में जाते हैं। इस तकनीक की वजह से ये डेटा सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ में नहीं आते है। ऐसा ही फेसबुक मैसेंजर, आईमैसेज स्नैपचैट, वीचैट आदि एप्स द्वारा जाने वाले डेटा के साथ भी है।

व्हाट्सएप, फेसबुक मैसेंजर तथा आईमैसेज जैसे एप्स के तहत डेटा शेयरिंग इनक्रिप्टेड कोड में होने के कारण यह सरकार और सुरक्षा ऐजेंसियों की नजर से बाहर होते हैं। ऐसे में इन एप्स द्वारा चलने वाली आतंकीवादी गतिविधयों का पता नहीं चल पाता, जो चिंता का विषय बनता जा रहा है।