Breaking News
May 3, 2019 - इरकॉन ने मनाया 43वां वार्षिक दिवस
April 18, 2019 - डाक विभाग को सर्वाधिक व्यवसाय देने वाले संस्थानों को डाक निदेशक केके यादव ने किया सम्मानित 
April 14, 2019 - साहित्यकार व ब्लॉगर आकांक्षा यादव  “स्त्री अस्मिता सम्मान-2019” से  सम्मानित
December 31, 2018 - आम आदमी के हित चिंतक थे लोकबंधु राजनारायण : गोपाल जी राय, लेखक व विचारक
December 31, 2018 - सरकार ने एमआईजी योजना के लिए सीएलएसएस की अवधि 31 मार्च, 2020 तक बढ़ाई
December 17, 2018 - गोपाल जी राय को विद्या सागर सम्मान
December 17, 2018 - श्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री एवं श्री सचिन पायलट ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली
December 4, 2018 - डाक निदेशक केके यादव ने किया दर्पण कोर सिस्टम इंटीग्रेटर का शुभारम्भ
क्या मुलायम सिंह और लालू यादव के बीच नए समीकरण की तैयारी ! !

क्या मुलायम सिंह और लालू यादव के बीच नए समीकरण की तैयारी ! !

नई दिल्ली : (संपादकीय) पिछले दिनों जब नई दिल्ली में जनता परिवार फिर एक होने की मनसा जाहिर किया तो ऐसा लगा जैसे तीसरा फ्रंट बनने की ओर एक मज़बूत पहल है। सभी दल जो पहले जनता परिवार से अलग हुए थे नई दिल्ली में मिले, सभी ने एक साथ मंच साझा किया और बीजेपी को टक्कर देने के लिए वाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके एक होने की अपनी मनसा जाहिर कर दिया। सभी दल इस बात पर राजी थे की श्री मुलायम सिंह यादव इस नए जनता पार्टी के मुखिया होंगे तथा पार्टी का एक चुनाव चिन्ह तय किया जायेगा जो सभी को मान्य होगा। इस बात पर भी चर्चा हुयी की अगला चुनाव हम सभी मिल कर लड़ेंगे और बीजेपी को एक मज़बूत टक्कर देने की कोशिस होगी। उस समय भी मीडिया और अन्य राजनितिक जानकारों को विश्वास नहीं हो रहा था की ये गठबन कितने दिन के लिए है? क्योकि तीसरा फ्रंट बनाने की अनुसंशा कई बार हुयी और फिर टूट गयी। ऐसा मानना है कि जैसे चुनाव आता है तीसरा फ्रंट बनने की कयावद चालू हो जाता है और कुछ दिनों में ही टूट जाता है।

इस बार ऐसा लग रहा था, कि बिहार में जनता परिवार बीजेपी को मात देने में सफल हो जायेगी और सीट वितरण से पहले कोई मतभेद दिखाई नही दे रहा था। परन्तु लालू यादव और नीतीश कुमार ने आपस में सीटो का बटवारा कर लिया और एनसीपी एवं समाजवादी पार्टी से कोई राय नहीं लिया। इस बात को दोनों ही पार्टियों ने गलत कहा, और मन मुटाव पैदा हो गया क्योकि दोनों पार्टियों ने ही बिहार में चुनाव लड़ने की मनसा पहले से ही जाहिर कर दिया था, इसके वावजूद उनसे कोई राय नहीं लिया गया।

दो दिन पहले जब मुलायम सिंह ने साफ कर दिया की समाजवादी पार्टी जनता परिवार से अलग हो कर बिहार में चुनाव लड़ेगी, तो ऐसा लगा की लालू यादव एवं नितीश कुमार को चुनाव से पहले बड़ा झटका लगा। परन्तु कुछ जानकारों का मानना है की राजद सुप्रीमो लालू यादव की यह कोई नई चाल तो नहीं है, जिससे नितीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से दूर रखा जा सके। इस बात की कयास और तेज हो गया जब कल मुलायम सिंह ने साफ कर दिया की समाजवादी पार्टी बिहार में सभी २४३ सीटो पर चुनाव लड़ेगी।

ऐसा लगता है की यदि बिहार चुनाव में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल का परफॉरमेंस सही रहा और जनता उन्हें पसंद की तो अगले मुख्यमंत्री के रूप में नितीश कुमार की दावेदारी कमजोर पड़ सकती है, और लालू यादव का कोई चहेता मुख्यमंत्री बन सकता है। ऐसा भी कयास लगाया जा रहा है कि मुलायम सिंह और लालू यादव की बीच इस तरह की पहल पहले से ही हो गयी थी । सीट बटवारा तो बस एक बहाना है, क्योंकि समाजवादी पार्टी की स्थिति बिहार में इतना मजबूत नहीं है की वे २४३ सीटो पर अपने उम्मीदवार खड़े कर सके। कंही न कंही इस बात पर दोनों नेताओ में सहमती हो सकती है कि, जन्हा राष्ट्रीय जनता दल का उम्मीदवार खड़ा होगा, वंहा उसे सपोर्ट करे और जन्हा जनता दल यूनाइटेड का उम्मीदवार हो, वंहा समाजवादी पार्टी को सपोर्ट किया जाये जिससे नीतीश कुमार को फिर से मुख्यमंत्री पद न मिल सके। और चुनाव के बाद समाजवादी पार्टी एवं राष्ट्रीय जनता दल मिल कर सरकार बना ले।

इन कयासों से तो ऐसा लग रहा की नितीश कुमार न तो घर के रहें न घाट के, उनकी समस्या बढती जा रही है, एक तरफ बीजेपी का आरोप की नीतीश जंगल राज फिर लाना चाह रहें है, और दूसरी तरफ इन्कोम्बंसी फैक्टर।

अब तो बिहार की जनता को फैसला करना है की अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। जब की चुनाव आयोग जल्दी ही चुनाव की तारीख की घोसरा करने वाला है सभी राजनितिक पार्टिया अपनी अपनी चल चलने और बिहार की जनता का विश्वास जितने की भर पूर कोशिश करेंगी। चुनाव के नतीजे ही बताएँगे की बीजेपी लोगों की पसंद है या नितीश कुमार ?

 

( लेखक: पी एम सिंह ,  वरिष्ठ पत्रकार, देश प्रदेश ख़बर , नई दिल्ली)