Breaking News
July 1, 2019 - डाक विभाग डिजिटल टेक्नालाजी के साथ कस्टमर-फ्रेंडली सेवाओं का  बढ़ा रहा दायरा – डाक निदेशक के के यादव
July 1, 2019 - बिहार के महादलितो को बंधुआगिरी से मिली मुक्ति, न्याय की आस में जंतर मंतर पर धरना
July 1, 2019 - अंतराष्ट्रीय मध्यम एवं लघु उद्योग दिवस के अवसर पर ‘राष्ट्रिय कवि सम्मलेन’- न्यूज़ इंक
July 1, 2019 - डाक टिकटों का शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने में अहम योगदान-डाक निदेशक के के यादव
May 31, 2019 - भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, क्षेत्रीय मुख्यालय (उत्तरी क्षेत्र) में विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया गया
May 31, 2019 - नरेंद्र मोदी ने किसको सौंपा कौन सा मंत्रालय ?
May 31, 2019 - राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य व साउथ ईस्ट एशिया में अग्रणी रहने पर राजस्थान को  मिला अवार्ड
May 3, 2019 - इरकॉन ने मनाया 43वां वार्षिक दिवस
‘कॉल टू एक्शन समिट 2015’ प्रधानमंत्री ने किया  उद्घाटन

‘कॉल टू एक्शन समिट 2015’ प्रधानमंत्री ने किया उद्घाटन

नई दिल्ली: मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को लेकर आयोजित ‘ग्लोबल कॉल टू एक्शन समिट 2015’ वैश्विक सम्मेलन आज शुरू हुआ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन किया. इस सम्मेलन में गर्भवती माताओं और नवजात शिशुओं की मृत्यु दर कम करने के उपायों पर चर्चा की जा रही है. प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर टीकाकरण कार्यक्रम मिशन इंद्रधनुष का भी उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री ने कहा कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में सालाना कमी की वर्तमान स्थिति बरकरार रही तो भारत सहस्राब्दि लक्ष्यों को हासिल करने के करीब पहुंच सकता है. उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दुनिया ने पोलियो को मिटाने में सफलता पाई है, उसी प्रकार जच्चा-बच्चा मृत्यु दर को घटाने में भी हम सफल होंगे.

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत ने नवजात शिशुओं और माताओं को होने वाली टिटनेस की बीमारी को मिटा दिया है. उन्होंने कहा कि ऐसे 184 जिलों की पहचान की गई है जहां स्वास्थ्य संबंधी अभियानों के अपेक्षित परिणाम नहीं मिले हैं, वहां और अधिक संसाधन मुहैया कराने के विशेष प्रयास किए जा रहे हैं.

 

इस सम्मेलन में केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा समेत 24 देशों के मंत्रियों का प्रतिनिधिमंडल भी भाग ले रहे हैं. गौरतलब है कि भारत दुनिया के उन पिछड़े देशों में शामिल हैं जहां जच्चा-बच्चा की मृत्यु दर अधिक है. डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक देश में प्रति लाख गर्भवती महिलाओं में से 190 मामलों में जच्चा या बच्चा की मौत हो जाती है. इस मामले में हम पाकिस्तान और श्रीलंका से भी पीछे हैं जहां मातृ-शिशु मृत्यु दर 170 के आसपास है.

Related Articles