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मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना से गरीब वर्ग की बेटियों के हाथों में लगे गी मेंहदी

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना से गरीब वर्ग की बेटियों के हाथों में लगे गी मेंहदी

अखिल राय ( स्टेट ब्यूरो )

लखनऊ 11 दिसम्बर 2017 : वर्तमान में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले ज़रूरतमन्द, निराश्रित/निर्धन परिवारों की विवाह योग्य कन्या/विधवा/परित्यक्ता/तलाकशुदा महिलाओं के विवाह के लिए शादी अनुदान योजना के तहत आर्थिक सहायता उपलब्ध कराते हुए ‘‘मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना’’ के माध्यम से सामूहिक विवाह सम्पन्न कराया जायेगा।
योजनान्तर्गत आच्छादित लोगों को उनकी सामाजिक/धार्मिक मान्यता एवं परम्परा/रीति-रिवाज के अनुसार विवाह करने की व्यवस्था कराकर समाज में सर्वधर्म-समभाव एवं सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वैवाहिक कार्यक्रम सम्पन्न कराये जायेंगे।
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग एवं सामान्य वर्ग के गरीब व्यक्तियों के पुत्रियों की शादी के लिए लागू ‘‘मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना’’ के सम्बन्ध में जारी शासनादेश के अनुसार समाज कल्याण विभाग को नोडल विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गयी है।
शासन के निर्देशानुसार 15 से 30 जनवरी 2018 के मध्य योजनान्तर्गत जनपद मुख्यालय पर 100 वैवाहिक जोड़ों का भव्य सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित किया जाना है। जिसमें जनपद के मा. प्रभारी मंत्री, सांसद एवं विधायकगण भी सम्मिलित होंगे।
इसी प्रकार समस्त विकास खण्ड मुख्यालयों एवं नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायतों में भी सामूहिक वैवाहिक कार्यक्रमों का भव्यता पूर्वक आयोजन सुनिश्चित किया जाना है। इसके लिए मुख्य विकास अधिकारी राकेश कुमार ने जिले के समस्त बीडीओ, अधि.अघिकारियों व अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत को निर्देश दिया है कि शासनादेश में दी गयी व्यवस्थानुसार निर्धारित प्रारूप पर आवेदन-पत्र प्राप्त कर आवेदन-पत्रों के पंजीकरण की व्यवस्था सुनिश्चित करायें।
‘‘मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना’’ की पात्रता के सम्बन्ध में व्यवस्था दी गयी है कि कन्या के अभिभावक उत्तर प्रदेश के मूल निवासी हों, कन्या/कन्या के अभिभावक निराश्रित, निर्धन तथा ज़रूरतमन्द हों।
आवेदक के परिवार की आय गरीबी रेखा की सीमा के अन्तर्गत होनी चाहिए या जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा यह निर्णय लिया गया हो, कि लाभार्थी की स्थिति नितान्त दैयनीय एवं वंचित है। प्रस्तुत किये गये आवेदन में पुत्री की आयु शादी की तिथि को 18 वर्ष या उससे अधिक होनी अनिवार्य है तथा वर के लिए 21 वर्ष की आयु पूर्ण हो गयी हो। आयु की पुष्टि के लिए स्कूल शैक्षिक रिकार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, मतदाता पहचान पत्र, मनरेगा जॉब कार्ड, आधार कार्ड मान्य होंगे।
विवाह के लिए निराश्रित कन्या, विधवा महिला की पुत्री, दिव्यांगजन अभिभावक की पुत्री, ऐसी कन्या जो स्वयं दिव्यांग हो, को प्राथमिकता प्रदान की जायेगी। निर्धन परिवारों की कन्या के विवाह/विधवा, परित्यक्ता/तलाकशुदा जिसका कानूनी रूप से तलाक हो गया हो, का पुनर्विवाह के लिए लाभ प्राप्त करने के लिए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के आवेदकों को जाति प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत करना होगा।
सामूहिक विवाह के लिए पंजीकरण तथा आवेदन के सम्बन्ध में दी गयी व्यवस्था के अनुसार सामूहिक विवाह में सम्मिलित होने वाली कन्याओं एवं विवाह करने वाले लड़कों (वर) को संयुक्त रूप से पंजीकरण के लिए निर्धारित प्रारूप (ग्रामीण क्षेत्र हेतु परिशिष्ट-1 पर एवं नगरीय क्षेत्र हेतु परिशिष्ट-2) पर समस्त संलग्नकों सहित ऑफलाइन आवेदन विवाह के लिए निर्धारित तिथि से 45 दिन पूर्व करना होगा।
आवेदन पत्र के अलावा विवाह पंजीयन के लिए कन्या व वर को 02-02 प्रति फोटो पृथक से देना अनिवार्य होगा। निर्धारित आवेदन-पत्र ग्रामीण क्षेत्र में जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत तथा शहरी क्षेत्र में नगर पालिका परिषद/नगर पंचायत के कार्यालयों में आवश्यक अभिलेखों के साथ जमा कराये जायेंगे। जहॉ पर आवेदन पत्र प्राप्ति की रसीद आवेदकों को उपलब्ध करायी जायेगी।
इस सम्बन्ध में यह भी व्यवस्था दी गयी है कि आवेदन-पत्र प्राप्ति के उपरान्त सम्बन्धित निकायों द्वारा आवेदकों की पात्रता का सत्यापन कराया जायेगा। अपरिहार्य कारणों से यदि ऐसे आवेदक जो सामूहिक विवाह कार्यक्रम के 01-02 दिन पहले ही आवेदन प्रस्तुत करते हैं, तो उनको सामूहिक विवाह कार्यक्रम में सम्मिलित करने का निर्णय सम्बन्धित निकाय स्वयं लेगी।
विवाह कार्यक्रम सम्पन्न होने के उपरान्त सम्बन्धित निकाय द्वारा वर-वधू को विवाह का प्रमाण-पत्र भी दिया जायेगा। योजना के लिए अनुदान स्वीकृत के लिए ग्रामीण क्षेत्र के लिए जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी व खण्ड विकास अधिकारी तथा नगरीय क्षेत्र के लिए नगर पालिका परिषद व नगर पंचायतों के अधि. अधिकारी अधिकृत हैं।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजनान्तर्गत कार्यक्रम आयोजन के लिए नगरीय निकाय, क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत तथा ऐसी शासकीय/अर्द्धशासकीय संस्थायें/स्वैच्छिक संस्थायें (एन.जी.ओ.) जिन्हें जिलाधिकारी द्वारा सामूहिक विवाह कार्यक्रम के लिए अधिकृत किया जाये, अधिकृत होंगी।
कार्यक्रम आयोजन के लिए सम्बन्धित निकाय द्वारा एक विवाह कार्यक्रम समिति गठित की जायेगी जो विवाह कार्यक्रम के लिए तिथि, स्थल का चयन, टेन्ट, भोजन एवं पानी, विवाह संस्कार, अतिथियों के सत्कार की व्यवस्था करेगी तथा क्षेत्र में कार्यक्रम की तिथि का प्रचार-प्रसार करायेगी।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजनान्तर्गत कन्या के दाम्पत्य जीवन में खुशहाली एवं गृहस्थी की स्थापना के लिए सहायता राशि रू. 20,000=00 मात्र कन्या के खाते में अंतरित की जायेगी। किन्तु विधवा, परित्यक्ता/तलाकशुदा के मामले में सहायता राशि रू. 25,000=00 मात्र होगी। इसके अलावा विवाह संस्कार के लिए आवश्यक सामग्री (चॉदी की बिछिया, पायल व कपड़े तथा 07 बर्तन) के लिए रू. 10,000=00 की व्यवस्था की गयी है। किन्तु विधवा, परित्यक्ता/तलाकशुदा के मामले में सहायता राशि रू. 5,000=00 होगी। सामग्री और मूल्य का निर्धारण जिला स्तरीय समिति द्वारा किया जायेगा।
सामूहिक विवाह योजनान्तर्गत लाभान्वित जोड़े अन्य विभागों द्वारा अन्तर्जातीय, अन्तर्धार्मिक अथवा इस निमित्त दी जाने वाली अन्य प्रोत्साहनात्मक योजनान्तर्गत दी जाने वाली अनुदान धनराशि की भी पात्रता रखेंगे। इस सम्बन्ध में दी गयी व्यवस्था के अनुसार सामूहिक विवाह कार्यक्रम के लिए गठित विवाह समिति स्वयंसेवी संस्थाओं तथा समाज के संभ्रांत व्यक्तियों से भी दान स्वरूप धनराशि प्राप्त कर सकती है, जिसका विवरण सम्बन्धित समिति द्वारा पृथक से रखा जायेगा।
प्रथम चरण में योजनान्तर्गत सारी कार्यवाही आफलाइन की जायेगी परन्तु भविष्य में साफ्टवेयर विकसित कर ऑनलाइन प्रक्रिया लागू कर दी जायेगी। वर एवं वधू की निर्धारित आयु पूर्ण नहीं होने की स्थिति में बाल विवाह अधिनियम के अन्तर्गत वर-वधू के दोषी माता-पिता अथवा अभिभावक के विरूद्ध कानूनी कार्यवाही भी की जा सकती है।