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इस्पात मंत्रालय द्वारा “भारत में इस्पात खपत बढ़ाने” पर  क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन

इस्पात मंत्रालय द्वारा “भारत में इस्पात खपत बढ़ाने” पर क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन

 

गंगटोक, 2 मार्च, 2017: माननीय केन्द्रीय इस्पात मंत्री, चौधरी बीरेंद्र सिंह ने आज गंगटोक, सिक्किम में “भारत में इस्पात खपत बढ़ाने” विषय पर पूर्वी राज्यों में पहली बार, क्षेत्रीय सम्मेलन का उदघाटन किया। उल्लेखनीय है कि भारत में मौजूदा इस्पात खपत 61 किलोग्राम प्रति व्यक्ति है, जो वैश्विक औसत 208 किलोग्राम प्रति व्यक्ति की तुलना में कम है। इस तरह से भारत में घरेलू इस्पात खपत बढ़ाने की बहुत अधिक क्षमता है।

इस सम्मलेन के जरिये इस्पात उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सभी संभावनाओं को तलाशा जाएगा। इस अवसर पर बोलते हुए माननीय मंत्री ने इस्पात के विभिन्न लाभों और इस्पात इंटेन्सिव स्ट्रक्चरस में टिकाउपन, सुरक्षा तथा कम निर्माण लागत जैसी खूबियों के चलते बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि इस्पात उद्योग को आम जनता को इस्पात के विभिन्न फायदे समझाने के अभिनव तरीके विकसित करने चाहिए।

उन्होंने कहा, “इस्पात एक ऐसा उत्पाद है, जिसका मटिरियल फलो और आय उपार्जन के मामले में पूर्व और आगे की शृंखला दोनों से मजबूत संबंध होता है। निर्माण व औद्योगिक मशीनरी से लेकर उपभोक्ता उत्पादों तक इस्पात का विभिन्न तरीके से उपयोग होता है।” आगे उन्होंने कहा कि सुदृढ़ इस्पात उद्योग देश के तेज गति से औद्योगिक विकास का आधार होता है और विश्व में तीसरे सबसे बड़े इस्पात उत्पादक के रूप में उभरने वाले भारत का वर्ष 2030-31 तक कच्चे इस्पात के 300 मिलियन टन स्थापित क्षमता का लक्ष्य हासिल करने की अपेक्षा की जाती है।

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माननीय मंत्री ने यह भी कहा, “माननीय प्रधानमंत्री द्वारा घोषित की गई अग्रणी योजनाओं, जैसे मेक इन इण्डिया, स्मार्ट सिटी, डिजिटल इण्डिया और स्किल इण्डिया पर केंद्र सरकार बहुत अधिक ज़ोर दे रही है। इनमें शामिल आधारभूत संरचना के एक भाग के रूप में वहनीय गृह निर्माण, रेलवे नेटवर्क का विस्तार, घरेलू जलयान निर्माण उद्योग का विकास, रक्षा क्षेत्रों को निजी भागीदारी के लिए खोलना, ऑटोमोबाइल क्षेत्र में अपेक्षित वृद्धि से देश में इस्पात की मांग में अप्रत्याशित वृद्धि होगी।”

इस्पात मंत्री ने स्वदेशी इस्पात के उपयोग पर ज़ोर दिया, जिससे न केवल इस्पात की खपत बढ़ेगी बल्कि इस्पात उद्योग और अर्थव्यवस्था के सतत विकास का मार्ग भी प्रशस्त होगा। सम्मेलन में मौजूद प्रतिनिधि हल्के वजन के उच्च कार्यक्षमता वाले इस्पात, प्री-फैब इस्पात संरचना, आरओबी (ROBs) में इस्पात का उपयोग, फ्लाईओवर, हाईवे में क्रैश बैरियर इत्यादि जैसे विभिन्न आधुनिक विकल्पों के उपयोग का मार्ग प्रशस्त करेंगे, जो इसलिए ज़रूरी है क्योंकि यह इस्पात के विभिन्न उपयोगों को शोकेस करने का बहुत ही उपयुक्त समय है। सम्मेलन के दौरान इस्पात के पर्यावरण अनुकूल और 100% रिसाइकल गुणों पर भी विमर्श किया गया, जिससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की सभी निर्माण परियोजनाओं में लागत प्रभावी विकल्प उपलब्ध कराये जा रहे हैं। सम्मेलन के दौरान इस्पात मंत्रालय द्वारा पूर्वी भारत में इस्पात को बढ़ावा देने के लिए किए गई पहलों पर प्रकाश डाला गया। इनमें कम लागत की आवासीय परियोजनाओं, इस्पात आधारित खेल स्टेडियम, पहाड़ी/भूकंपीय क्षेत्र की अन्य संरचनाओं, इस्पात फ्रेम पर आधारित कम लागत के घर बनाने और पूर्वी क्षेत्र की संरचनात्मक आवश्यकता के अनुसार प्री फैब इस्पात के सघन घर शामिल हैं।

इस क्षेत्रीय सम्मेलन के उदघाटन से पहले, स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया लिमिटेड (सेल) द्वारा एक उपभोक्ता बैठक का भी आयोजन किया गया। सेल उपभोक्ता बैठक के प्रतिभागियों भी क्षेत्रीय सम्मलेन के विमर्श में सहभागी बने।

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इस क्षेत्रीय सम्मेलन में संयुक्त सचिव (इस्पात मंत्रालय) श्री सुनील बड़थ्वाल, सेल अध्यक्ष श्री पी. के. सिंह, एचएससीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री एम. भादुरी, इन्सडैग (INSDAG) के महानिदेशक श्री सुशीम बनर्जी और निजी इस्पात क्षेत्र के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। इस सम्मेलन के प्रतिनिधियों में एप्रोप्रिएट अल्टरनेटिव, कोलकाता के मुख्य वास्तुकार श्री अंजन मित्रा, कंस्ट्रक्शन कैटालाइजर, पुणे के वास्तुकार और संस्थापक निदेशक श्री धनंजय डाके, गंगटोक के वास्तुकार और संरचनात्मक इंजीनियर श्री के.के. रसैली, मेसर्स किरबे इण्डिया लिमिटेड श्री कुणाल सूत्रधार भी शामिल रहे। इन लोगों ने इस्पात खपत बढ़ाने पर अपने विचार रखे और इस्पात के नवीन उपयोगों और इनके अनूठे गुणों पर प्रकाश डाला।

यह सम्मेलन केंद्र एवं राज्य परियोनाओं के नीति-निर्माता, वास्तुकार, संरचनात्मक डिजाइनर और सलाहकार, परियोजना वित्तपोषक, ठेकेदार, फैब्रिकेटर, इरेक्टर, धातुकर्म, यांत्रिकी और सिविल इंजीनियरिंग विभागों के प्राध्यापक, वृहद बुनियादी उद्योगों और इस्पात/इंजीनियर/वास्तुकार समितियों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति का भी गवाह बना। इस सम्मेलन ने उपभोक्ता दृष्टिकोण और उत्पादकों की प्रतिक्रिया को आपस में साझा करने के लिए एक अनूठा मंच प्रदान किया।