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राजस्थान की दो बहुउद्देषीय जल परियोजनाओं को राष्ट्रीय महत्व की परियोजना घोषित करे केन्द्र सरकार

राजस्थान की दो बहुउद्देषीय जल परियोजनाओं को राष्ट्रीय महत्व की परियोजना घोषित करे केन्द्र सरकार

नई दिल्ली, 05 जनवरी, 2017। राजस्थान के उद्योग एवं राजकीय उपक्रम मंत्री श्री राजपाल सिंह शेखावत ने कहा कि राजस्थानकी परवन बहुउद्देेशीय सिंचाई परियोजना एवं पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना को राष्ट्रीय महत्व की परियोजना घोषित करने की मांग कीताकि राजस्थान में सिंचाई एवं पेयजल की समस्याओं का त्वरित निदान किया जा सके।

श्री शेखावत नई दिल्ली के विज्ञान भवन में केन्द्रीय वित मंत्री श्री अरूण जेटली की अध्यक्षता में आयोजित पूर्व बजट बैठक मेंराजस्थान का पक्ष रखते हुए बोल रहे थे। इस अवसर पर राज्य के प्रमुख वित्त सचिव श्री पी.एस.मेहरा भी मौजूद थे।

श्री शेखावत ने केन्द्र सरकार से आग्रह किया कि राज्य की परवन नहर परियोजना एवं पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना को राष्ट्रीयमहत्व की परियोजना घोषित की जावे। परवन नहर परियोजना से राज्य के झालावाड़, बारां और कोटा जिलो के करीब 800 गांवों कोपेयजल की उपलब्धता के साथ-साथ 2.06 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई सुविधा भी प्राप्त हो सकेगी।

उन्होंने कहा कि परवन नहर परियोजना के अंतर्गत 462 मिलियन क्यूबेक पानी की क्षमता वाले 2435.93 करोड़ की लागत सेबनने वाले बांध की स्वीकृति केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2013 में प्रदान कर दी गई थी। जिसके कार्य को राष्ट्रीय महत्व की घोषणा होने परगति दी जा सकेगी।

श्री शेखावत ने राज्य की पूर्वी नहर परियोजना को भी राष्ट्रीय महत्व की परियोजना का दर्जा प्रदान करने की मांग रखते हुए कहाकि राजस्थान जैसे भौगोलिक विविधताओं वाले राज्य में इंटर बेसिन जल अंतरण के कार्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने बतायाकि उक्त संकल्पना के तहत ही पूर्वी राजस्थान की चंबल नदी बेसिन के अतिरिक्त पानी को पश्चिमी राजस्थान के जल अभाव वाले जिलोंतक पहुूचाने के लिए बहुप्रतीक्षित पूर्वी राजस्थान नहर बनाने का कार्य किया जाना है इसके लिए केन्द्र सरकार द्वारा राज्य को सहयोगप्रदान करते हुए राष्ट्रीय महत्व की परियोजना घोषित किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि करीब 38081 करोड़ की अनुमानित लागत से बनने वाली इस नहर के माध्यम से पश्चिमी एवं मध्य राजस्थान केकरीब 13 से अधिक जिलों में पेयजल, उद्योग, सिंचाई सहित डी.एम.आई.सी. कॉरीडोर में जलापूर्ति की समस्याओं का निराकरण कियाजा सकेगा।

डिस्कॉम की वित्तीय पुर्नसंरचना के लिए राज्य की कुल अतिरिक्त ऋण सीमा में वृद्धि की जावें

श्री शेखावत ने बैठक में राजस्थान की विद्युत कंपनियों मेें पिछली सरकार के कुप्रबंधन के कारण हुए भारी वित्तीय घाटे का जिक्रकरते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा केन्द्र प्रवर्तित उदय योजना के अंतर्गत विद्युत वितरण कंपनियो के करीब 60 हजार करोड़ रूप्येसे अधिक के वित्तीय उत्तरदायित्व अपने उपर लिए जाने से राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ा हुआ है। इससे उभरने के लिएकेन्द्र सरकार द्वारा अगले तीन वर्षो में एफ.आर.बी.एम. कानून के अंतर्गत राज्य की कुल अतिरिक्त ऋण सीमा मेें राज्य के सकल घरेलूउत्पाद की 1.5 प्रतिशत से 2 प्रतिशत वृद्धि की जानी चाहिए। ताकि राज्य सरकार विकास हेतु संसाधनों को एकीकृत ढ़ंग से इस्तेमाल करसके।

रतलाम-डूंगरपुर रेलवे लाईन की पूर्ण लागत वहन करे केन्द्र सरकार

श्री शेखावत ने बैठक में केन्द्र सरकार से आग्रह किया कि जैसलमेर-बाड़मेर-गांधीधाम-मूंदड़ा पोर्ट तक बनाई जाने वाली करीब338 किमी लंबी रेलवे लाईन एवं रतलाम-डूंगरपुर रेलवे लाईन के निर्माण की संपूर्ण लागत केन्द्र सरकार द्वारा उठाये जाने की घोषणाआगामी केन्द्रीय वित्त बजट में की  जानी चाहिए। इससे दक्षिणी राजस्थान में रेल सुविधाआंे को बढ़ावा देने में सहयोग मिलेगा।

केन्द्र प्रर्वतित परियोजनाओं के बकाया केन्द्रीय अंश जल्द जारी करे केन्द्र सरकार

बैठक में श्री शेखावत ने केन्द्र प्रर्वतित परियोजनाआंे के सुगम कार्यन्वयन हेतु बकाया केन्द्रीय हिस्से को जल्द जारी करने काआग्रह किया। उन्होंने सर्वशिक्षा अभियान का बकाया केन्द्रीय हिस्सा 2426 करोड़ रूप्ये जल्द जारी करने की मांग रखते हुए कहा किसर्वशिक्षा अभियान और मनरेगा जैसी केन्द्र प्रवर्तित परियोजनाओं के संचालन हेतु केन्द्रीय हिस्से के देरी से भुगतान के कारण राज्य परलगातार अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है इसलिए उक्त परियोजनाआंे के बकाया केन्द्रीय वित्तीय अंश जल्द जारी किया जाना उचितहोगा।

श्री शेखावत ने राज्य में हरित उर्जा को बढ़ावा देने के लिए आगामी वित्त वर्ष के दौरान 30 हजार सोलर पंप लगाने के लिए राज्यको 450 करोड़ रूप्ये की राशि प्रदान करने का आग्रह भी किया। उन्होनंे कहा कि अनुसूचित जाति एवं