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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: राजपथ बदला योगपथ में

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: राजपथ बदला योगपथ में

आज दुनिया भर में मनाये जा रहे पहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम की कमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यहां लगभग 35 हजार लोगों के साथ ‘राजपथ को योगपथ’ में बदलते हुए संभाली और कहा कि योग अभ्यास का यह सूरज ढलता नहीं है। प्रधानमंत्री ने योग को परिभाषित करते हुए कहा कि यह मानव मन को शांति और सौहार्द के लिए उन्मुख करने की एक पारंपरिक कला है। यह पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 192 देशों के 251 से अधिक शहरों में मनाया जा रहा है। यही नहीं दुनिया के सबसे उंचे युद्ध स्थल सियाचिन से लेकर समुद्र में भारतीय युद्धपोतों पर भी योग किया गया।

इस संदर्भ में प्रधानमंत्री ने यहां राजपथ पर वृहद योग कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में कहा, सूरज की पहली किरण जहां जहां पड़ेगी और 24 घंटे बाद सूरज की किरण जहां समाप्त होगी, ऐसा कोई भी स्थान नहीं होगा और पहली बार दुनिया को यह स्वीकार करना होगा कि यह सूरज योग अभ्यासी लोगों के लिए है और योग अभ्यास का यह सूरज ढलता नहीं है।

मोदी ने कहा, हम केवल इसे एक दिवस के रूप में नहीं मना रहे हैं बल्कि हम मानव के मन को शांति के नये युग की ओर उन्मुख बना रहे हैं। यह कार्यक्रम मानव कल्याण का है और शरीर, मन को संतुलित करने का माध्यम और मानवता, प्रेम, शांति, एकता, सद्भाव के भाव को जीवन में उतारने का कार्यक्रम है। निर्धारित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री को उपस्थित लोगों को केवल संबोधित करना था और उनका योग करने का कोई कार्यक्रम नहीं था। लेकिन उन्होंने 21 योग आसनों में से अधिकतर में हिस्सा लेकर सबको चौंका दिया। उन्होंने आम लोगों के बीच बैठकर योगासन किया। इस दौरान वह योगासन कर रहे लोगों के बीच भी गए। इस कार्यक्रम में मुस्लिम समुदाय के कई लोग पारंपरिक टोपी पहने योग करते देखे गए। योगासन के लिए राजपथ पर भारी संख्या में लोगों के उपस्थित होने पर प्रधानमंत्री ने हर्ष जताते हुए कहा, क्या किसी ने कल्पना की होगी कि राजपथ, योगपथ बन जायेगा।

प्रधानमंत्री की पहल पर संयुक्त राष्ट्र ने पिछले वर्ष दिसंबर में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था और 177 देश इसके सह प्रस्तावक बने थे। यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री ने पिछले वर्ष सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने पहले संबोधन के दौरान रखा था। योग कार्यक्रम को विपक्ष द्वारा निशाना बनाये के बीच प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि इस कार्यक्रम मकसद सिर्फ और सिर्फ मानवता का कल्याण और सद्भावना एवं तनाव से मुक्ति के संदेश का प्रसार है।

प्रधानमंत्री ने कहा, मेरे लिये यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है कि यह (योग) किस भूमि पर पैदा हुआ, किस भाग में इसका प्रसार हुआ। महत्व इस बात का है कि मानव का आंतरिक विकास होना चाहिए। हम इसे केवल एक दिवस के रूप में नहीं मना रहे हैं बल्कि हम मानव मन को शांति एवं सद्भवना के नये युग की शुरुआत के लिए प्रशिक्षित कर रहे हैं। मोदी ने कहा कि दुनिया ने विकास की नई उंचाइयों को हासिल किया है। प्रौद्योगिकी एक प्रकार से जीवन के हर क्षेत्र में प्रवेश कर गया है। बाकी सब चीजे तेज गति से बढ़ रही हैं। दुनिया में हर प्रकार की क्रांति हो रही है। लेकिन कहीं ऐसा न हो कि इंसान वहीं का वहीं बना रह जाए और विकास की अन्य सभी व्यवस्थाएं आगे बढ़ जाएं। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर इंसान वहीं का वहीं बना रह जाएगा और विकास की अन्य व्यवस्थाएं आगे बढ़ जायेंगी तब एक मिसमैच (असंतुलन) हो जायेगा। और इसलिए मानव का भी आंतरिक विकास होना चाहिए। विश्व के पास इसके लिए योग ऐसी ही एक विद्या है। मोदी ने कहा कि योग का महत्व इस संदर्भ में है कि हम सबके साथ अंतर्मन को कैसे ताकतवर बनाएं और मनुष्य ताकतवर बनकर कैसे शांति का मार्ग प्रशस्त करे।

राजपथ पर आयोजित इस कार्यक्रम में दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी आसन किये। इस वृहद समारोह में काफी संख्या में विदेशी मिशनों के राजनयिकों ने भी हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री के साथ मंच पर योगगुरू रामदेव समेत कुछ अन्य योग एवं अन्य धार्मिक संस्थाओं के प्रमुख भी मौजूद थे। मोदी ने कहा, ज्यादातर लोग योग को अंग मर्दन का माध्यम मानते हैं। मैं मानता हूं कि यह सबसे बड़ी गलती है। अगर योग अंग गोपांग मर्दन का कार्यक्रम होता तब सर्कस में काम करने वाले बच्चे योगी कहलाते। शरीर को केवल मोड़ देना या अधिक से अधिक लचीला बनाना ही योग नहीं है। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जतायी कि देश में योग के पक्ष में माहौल बनेगा और यह भविष्य में भी जारी रहेगा।

मोदी ने कहा, हम केवल इसे एक दिवस के रूप में नहीं मना रहे हैं बल्कि हम मानव के मन को शांति के नये युग की ओर उन्मुख बना रहे हैं। यह कार्यक्रम मानव कल्याण का है और शरीर, मन को संतुलित करने का माध्यम और मानवता, प्रेम, शांति, एकता, सद्भाव के भाव को जीवन में उतारने का कार्यक्रम है। एक ही स्थान पर इतनी बड़ी संख्या में लोगों के योग करने को देखते हुए आयुष मंत्रालय ने एक ही स्थल पर सबसे बड़े योग प्रदर्शन के लिए इसे गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज कराने का निर्णय किया है।

यही नहीं देशभर में 11 लाख से अधिक एनसीसी कैडेट और सुरक्षा एवं पुलिस बलों के करीब नौ लाख कर्मियों ने अपनी अपनी क्षेत्र इकाइयों में योग किया। इसके अलावा सभी राज्यों में यह दिवस मनाने के लिए जिला एवं पंचायत मुख्यालयों पर भी योग कार्यक्रम हुए।

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