Breaking News
December 14, 2017 - प्रदेश में कल से राष्ट्रपति का दो दिवसीय दौरा
December 13, 2017 - प्रधानमंत्री कल नौसेना पनडुब्‍बी आईएनएस कलवारी को देश को समर्पित करेंगे 
December 13, 2017 - राजभवन में आयोजित कार्यक्रम में कुम्भ लोगो व ओ0एस0टी0एस0 पोर्टल लाॅन्च किया गया
December 11, 2017 - मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना से गरीब वर्ग की बेटियों के हाथों में लगे गी मेंहदी
December 5, 2017 - उ0प्र0 एवं उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्रियों ने गोरखपुर में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के स्थापना समारोह को सम्बोधित किया
December 4, 2017 - राष्‍ट्रपति कल डॉ. भीमराव अम्‍बेडकर विश्‍वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे 
November 9, 2017 - एक सरप्राइज रिजल्ट की ओर बड़ता हुआ हिमाचल चुनाव
October 27, 2017 - डाक निदेशक श्री केके यादव और उनकी पत्नीआकांक्षा जी ‘शब्द निष्ठा सम्मान’ से सम्मानित हुए
अरुण जेटली ने गांधी के संग्रहित कार्यों के इलैक्‍ट्रोनिक संस्‍करण का शुभारंभ किया

अरुण जेटली ने गांधी के संग्रहित कार्यों के इलैक्‍ट्रोनिक संस्‍करण का शुभारंभ किया

वित्‍त, कारपोरेट मामले और सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अरुण जेटली ने आज गांधी शांति प्रतिष्‍ठान में महात्‍मा गांधी के संग्रहित कार्यों के इलैक्‍ट्रोनिक संस्‍करण का शुभारंभ किया। यह 1884 से 30 जनवरी 1948 तक गांधीजी द्वारा हर दिन बोली और लिखी गई बातों का स्‍मारक दस्‍तावेज है। मंत्री महोदय ने इस संस्‍करण को प्रामाणिक गांधीवाद के व्‍यापक संग्रह-  गांधी विरासत पोर्टल पर भी अपलोड किया। विश्‍व के लोगों के लिए महात्‍मा गांधी के संग्रहित कार्यों तक सरल और मुफ्त पहुंच सुनिश्चित करने के लिए ई-सीडब्‍ल्‍यूएमजी इस पोर्टल पर पीडीएफ रूप में उपलब्‍ध है। इस अवसर पर श्री जेटली ने यह भी घोषणा की कि संपूर्ण गांधी वांड्गमय के इस स्‍मारक संस्‍मरण के हिन्‍दी संस्‍करण का जल्‍दी ही डिजिटीकरण किया जाएगा। इस अवसर पर सूचना एवं प्रसारण राज्‍यमंत्री कर्नल राज्‍यवर्द्धन सिंह राठौर, सूचना एवं प्रसार सचिव श्री सुनील अरोड़ा और विशेषज्ञ समिति के सदस्‍य

इस अवसर पर श्री जेटली ने कहा कि ई-सीडब्‍ल्‍यूएमजी परियोजना के यर्थाथ और विरासत के आदर्श के सहयोगी और साझेदार ऐसे संस्‍थान हैं जिन्‍हें गांधीजी ने स्‍थापित और विकसित किया था। जेटली ने कहा कि महात्‍मा गांधी के संग्रहित कार्यों के डिजिटल संस्‍करण, अमूल्‍य राष्‍ट्रीय  विरासत के संरक्षण और मानवता के प्रसार में सहायक होगा।